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अब्दुल अमीन

किशनगढ़। जिसे ‘मार्बल नगरी’ कहकर गर्व किया जाता है, वह किशनगढ़ आज प्रशासन और रीड कोर (RIDCOR) की लापरवाही के चलते ‘ नरक नगरी‘ बनने की कगार पर है। हनुमानगढ़-किशनगढ़ मेगा हाईवे पर चौतरफा धूल का गुबार छाया है, जो न सिर्फ सड़क को ‘मौत का हाईवे’ बना रहा है, बल्कि मार्बल नगरी के नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी सीधा हमला कर रहा है।
मोहनपुरा मोड़ से रलावता तक की इस बर्बाद सड़क ने पिछले एक साल में कई परिवारों के “लाल” छीन लिए हैं, फिर भी प्रशासन और रीड कोर गहरी, निर्लज्ज चुप्पी साधे हुए हैं।
मार्बल डस्ट: मार्बल नगरी मे Granite फैक्ट्रियों के फैलाव और इसके निजी डंप होते पाउडर से जगह जगह हाईवे पर बढ़ रहा ‘जहरीला गुबार’
हाईवे की टूटी-फूटी हालत को मार्बल उद्योग से उड़ने वाली ‘पाउडर डस्ट’ (Powder Dust) ने अधिक जानलेवा बना दिया है। मार्बल ग्रैंनाईट की बारीक डस्ट, टूटी सड़कों की धूल के साथ मिलकर हवा में ‘ज़हर का गुबार’ पैदा कर रही है। यह प्रदूषण इतना घातक है कि यह सीधे नागरिकों के फेफड़ों और श्वसन तंत्र पर हमला कर रहा है। किशनगढ़ में स्वास्थ्य संबंधी गंभीर खतरे पैदा हो चुके हैं, लेकिन किसी को परवाह नहीं!
सड़क हादसों का कारण बना प्रदूषण: यह घना धूल का अंबार अक्सर ज़ीरो विजिबिलिटी (शून्य दृश्यता) पैदा कर देता है। दोपहिया वाहन चालक रोज़ाना दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं क्योंकि उन्हें आगे चलने वाला वाहन तक दिखाई नहीं देता। प्रदूषण अब केवल पर्यावरण की समस्या नहीं, बल्कि सीधे-सीधे सड़क पर मौत का बुलावा बन चुका है!
शोरूम/गोदामो के रैंप्स: हाईवे पर बढ़ता अतिक्रमण*
सड़क की चौड़ाई पर सबसे बड़ा और चिंताजनक हमला है अतिक्रमण और अनाप-शनाप बढ़ते रैंप्स का प्रचलन।
जिसकी मर्ज़ी, उतना बड़ा रैंप: किसी का कोई डर नहीं, जिसकी इच्छा हो, वह अपनी मर्जी से अपने शोरूम या गोदाम के आगे जितना चाहे उतना बड़ा रैंप बना लेता है।*
साइड रोड हुई खत्म: इन अवैध कब्ज़ों और अनियोजित, बेतरतीब रैंप्स के कारण चौड़े मेगा हाईवे की साइड रोड लगभग सिकुड़कर खत्म हो चुकी है। इसका सबसे बड़ा खामियाजा दोपहिया वाहन चालकों को भुगतना पड़ता है, जो मुख्य सड़क से हटकर निकलने की कोशिश में दुर्घटना का शिकार होते हैं।
भीषण जाम स्थायी अभिशाप:
रोज़ाना हज़ारों भारी वाहन इस संकरी रोड से गुज़रने की जद्दोजहद करते हैं, जिससे घंटों लंबा जाम लगना आम बात हो गई है। अरबो रुपयो का राजस्व देने वाली मार्बल नगरी के व्यापारी, मजदूर और आम यात्री दिन-रात परेशान हैं हैरान है
खड्डों का राज: बरसाती दरिया और ‘मौत के गड्ढे’*
मोहनपुरा मोड़ से रलावता तक सड़क का हाल बदतर है। यह हाईवे जगह-जगह से टूटकर गहरे खड्डों और गड्ढों में बदल चुकी है। जहां बरसात में यह सड़क दरिया बन जाती थी, वहीं अब बरसात के बाद ये खड्डे इतने खतरनाक हो गए हैं कि ये वाहन चालकों के लिए खुले मौत के जाल बन चुके हैं।
प्रशासन की नाकमायाबी: हादसा होने पर, जब किसी घर का लाल काल का ग्रास बनता है, तब ‘बेबस’ प्रशासन सिर्फ कागज़ी खानापूर्ति करता है। इसके तुरंत बाद, वही उदासीनता और निष्क्रियता हावी हो जाती है। जनता सवाल पूछ रही है: क्या इस बदहाली को रोकने मे कौन आगे आयेगा?
किशनगढ़ की पुकार: आखिर कब जागेगा प्रशासन?*
जनता पूछ रही है—
इस ‘मौत के हाईवे’, ‘जानलेवा डस्ट’ और ‘अतिक्रमण के आतंक’ से मार्बल नगरी को मुक्ति कब मिलेगी?
इस बदहाल हाईवे की जिम्मेदारी से प्रशासन और रीडकोर कब भागना बंद करेंगे?
Author: ABDUL AMIN
REPORTER KISHANGARH AJMER
